सोमवार, 19 अप्रैल 2010

यहाँ विचारों की स्वतंत्रता के कोई मायने नहीं.

हमारे पूर्व विदेश राज्य मंत्री शशि थरूर साहब को भारत आने से पहले इस बात को अच्छी तरह जान लेना था कि भारत न तो यूरोप है न ही अमरीका जो खुल के कभी भी जब चाहा ब्लॉग पर अपने विचार लोगों से बाँट लिए। भैये! ये तो भारत है जहां विचार अभिव्यक्ति कि स्वतंत्रता सिर्फ संविधान में ही विचरण करती है थरूर अभी भी यही सोच रहे होंगे कि अगर अपना इस्तीफ़ा भी ट्विट्टर पे दिया होता तो शायद ज्यादा ठीक रहता। आखिरकार कांग्रेस ने अपने इस तथाकथित बिगडेल बच्चे के कान उमेठ ही दिए।
और जिसका डर था वो भी हुआ , आखिरकार आई पी एल भारत कि राजनीती पर हावी हो ही गया। संसद में मुद्दों कि कमी हो गयी और हंगामा हुआ उसी आई पी एल की वजह से। अब मोदी साहब ! आप की बारी है तैयार हो जाइये क्योंकि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता सिर्फ संविधान में ही है।

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