बुधवार, 14 अप्रैल 2010

उसको भुला दिया

अब किसको दोष देगा ये भारतीय समाज? एक ज़माना बीत गया उस शख्सियत को हमारे बीच से गए जिसने समाज में समानता का सपना देखा था। जिसने दबे कुचले लोगों के लिए आवाज़ बुलंद की थी, जिसने एक पिछड़े हुए समाज को फिर से सपने दिखाए , उन्हें आशाओं के पंख दिए। सबने सोचा ये ही है वो मसीहा जो इस समाज को जातिवाद के दलदल से निकालेगा लेकिन भारतीय समाज के क्या कहने , उसको न केवल भुला दिया बल्कि गलत भी ठहरा दिया।
आज बाबा साहब अम्बेडकर केवल मूर्तियों में जिंदा हैं और उनका सपना अभी भारतीय राजनीती की गन्दी नालियों में आखिरी सांस लेता नज़र आ रहा है।
अब बताइये दोष किसका अंग्रेजों की 'फूट डालो राज करो ' की नीति का या 'हमारा' ???

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