रविवार, 24 मार्च 2013

मैं नहीं बदलूंगा

क्या चिल्लाकर ये साबित कर दोगे कि तुम सही हो? क्या दूसरे की बात सुने बगैर तुम कह सकते हो कि तुम ही सही हो? क्या अपने हिसाब से तुम किसी के विचार बिना पूछे ही घोषित कर सकते हो?

कोई भी पढ़ा लिखा व्यक्ति तुम्हारे साथ नहीं खड़ा होगा। क्योंकि अपने मुताबिक बात मनाने के लिए तुम मेरी स्वतंत्रता का हनन कर रहे हो। मैं पहले भी सही था कि केवल अच्छी जगह पढ़ लिख जाने से न तो तुम्हारा मानसिक विकास हो सकता है और न ही तुम्हारी मानसिकता बदल सकती है। तुम कितना भी ये सोचो कि मैं तुम्हारी भाषा में ही तुमसे बात करूंगा तो ये तुम्हारी गलती है। मैं जैसा हूं वैसा ही रहूंगा और तुम्हारे कहने से तुम्हारी भाषा तो कतई नहीं बोलूंगा।

और चिल्लाओ, कितना चिल्लाओगे? अब मैं नहीं, मेरी कलम ही बोलेगी। इसके बाद ये समझने की भूल भी मत करना कि मैं कमजोर हूं वरना तुम बहुत पछताओगे। तुम ये घोषित नहीं कर सकते कि मुझे धार्मिक (नास्तिक नहीं) होना चाहिए। तुम ये घोषित नहीं कर सकते कि केवल तुम्हारे ही राजनीतिक और सामाजिक विचार सही हैं। तुम नहीं घोषित कर सकते कि मेरे विचार गलत हैं जब तक कि तुम उन्हें जानो ही नहीं। इसका सबसे बड़ा कारण ये है कि न केवल मैं अपनी बल्कि तुम्हारी भी विचारों के प्रति स्वतंत्रता का सम्मान करता हूं।

तुम्हारे कहने से मैं किसी जनसंहारक नेता का समर्थन कभी नहीं करूंगा। एक इंसान होने के नाते, मैं आदमी की जान की कीमत समझता हूं। तुम ये कभी इसलिए नहीं समझ सकते क्योंकि तुम एक ऐसे धर्मांध व्यक्ति हो जो केवल धर्म और विचारधारा के आधार पर ही किसी को आदमी न समझे। ये तुम्हारा घमंड ही है जो तुम ये समझते हो कि सारी दुनिया की जानकारी केवल तुम्हारे पास है। अगर मैं सब कुछ नहीं जानता तो इतना भी जान लो कि मैं वो सब कुछ भी जानता हूं जोकि शायद तुम नहीं जानते। तुम तर्कों की बात मुझसे करते हो लेकिन खुद ही अपने तर्कों को मजबूत करने के लिए कोई ठोस सबूत ही नहीं रख सकते। खोखलापन केवल तुम्हारे विचारों से ही नहीं बल्कि तुम्हारे तर्कों से भी झलकता है। तुम कमजोर थे और हो इसीलिए तुम चिल्ला रहे हो। मुझे तुमसे डर नहीं लगता। तुम फिर से और कोशिश कर सकते हो लेकिन मैं फिर भी किसी धर्मांध विचारधारा, नेता या वैमनस्य की भावना का समर्थन नहीं करूंगा। ये जान लो कि मैं नहीं बदलूंगा।
विचार हमेशा से सहर्ष आमंत्रित हैं।  

बुधवार, 6 मार्च 2013

लोकतांत्रिक गुंडावाद



गौर कीजिए, ये हमारे यहां की नवीन राजनीतिक लहर है लोकतांत्रिक गुंडावाद। जैसे जेपी और लोहिया का समाजवाद आया, मार्क्स और माओ का वामपंथ आया, केजरीवाल का आम आदमीवाद आया वैसे ही अखिलेश, मोदी, ठाकरे, शिवराज और न जाने कितने फलाने-ढिमाकों का लोकतांत्रिक गुंडावाद आया।
कह लीजिए कि फिर से पागल हो गया है... लेकिन जब तर्कों से साबित करूंगा तो फिर से कुतर्की कमेंट कर या ई-मेल कर अपने गुंडावादी नेताओं को सही साबित करने लगोगे। पुराना उदाहरण बाद में लूंगा कभी, अभी ताजा लेते हैं। यूपी में एक डीएसपी मारा गया है। कोई बता सकता है किसने मारा है? जिस इलाके में ये डीएसपी तैनात था, उस इलाके का सबसे बड़ा गुंडा कौन है? इस इलाके में आज से कुछ साल पहले किस के घर के तालाब से नर कंकाल मिले थे? हां, जव़ाब सबको पता है, लेकिन बोलेगा कोई नहीं। अब इन गुंडावादी ताकतों के साथ आ जाएं गुंडों की पार्टी के सीएम अखिलेश यादव के समर्थक। जानता हूं, कि मशहूर होता और आगरा में बैठ ये ब्लॉग लिख रहा होता तो अब तक मेरे घर पर गोलियां चल चुकी होतीं। क्योंकि जिसके पास भी आज दो नम्बर का रुपया है वो सफेद पैंट-कमीज पहन इसी लोकतांत्रिक गुंडावाद में शामिल होना चाहता है। लेकिन दिल्ली में ये चूहे मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते क्योंकि सोनिया मैडम के पास सीबीआई नाम की बिल्ली है।
क्या कोई युवा नेता अखिलेश से पूछ सकता है कि एक गिरे हुए और सामंतवादी व समाजवादी विरोधी रघुराज सिंह (माफ कीजिए लेकिन प्रताप है ही नहीं इस गुंडे में) की पैरवी इनकी ही पार्टी के लोग क्यों कर रहे हैं। कायदा तो कहता है कि मंत्री पद छोड़ने के बाद रघुराज प्रताप सिंह नाम के गुंडे की रात हवालात में कटनी चाहिए थी। लेकिन जब लोकतांत्रिक गुंडावाद होगा तो इसके जैसा गुंडा मीडिया के सामने कुतर्क देकर अपनी एसयूवी में निकल जाएगा और पीछे-पीछे वही सफेद पैंट-कमीज वाले दो नम्बरी और कॉलेजों में लड़कियों के छेड़ने वाले गुंडे पीछे भागते दिखाई देंगे।
देखिए, व्यवस्था में ऐसे लोगों को लोकप्रिय घटिया समर्थक भी मिल जाते हैं। संसद में एक लड़की के बलात्कार पर घड़ियाली आंसू बहाने वाली कलाकार अखिलेश यादव को पार्टी लाइन के तहत युवा मुख्यमंत्री कह उनकी बढ़ाई कर रही हैं। मैडम को बताओ कोई कि जो लड़की विधवा हुई है वो बेबस नहीं बल्कि प्रदेश के एक पुलिस अधिकारी की पत्नी थी। उसके लिए उनके मन में कोई क्षोभ नहीं है क्योंकि खिलाफत करने पर न तो ये अगली बार सांसद रहेंगी और न ही यूपी में इनके दो नम्बर के पैसे को लगाने की इजाजत मिलेगी। दूसरी ओर, दिल्ली में भी कांग्रेस के घड़ियाली आंसू देख लीजिए कि यूपी में अराजकता का माहौल है। क्या इसी मुद्दे पर यूपी सरकार और समाजवादी पार्टी को कोसने वाली कांग्रेसी नेता परणीत कौर बता सकती हैं कि फिर ऐसे गुंडों से समर्थन लेकर केंद्र में सरकार क्यों चलाई जा रही है। उत्तर नहीं मिलेगा क्योंकि न केवल सब चोर हैं बल्कि चोरी सोची समझी साजिश के तहत सारे मौसेरे भाई मिल कर कर रहे हैं।
ऐसी ही सरकार के गुंडों ने मध्य प्रदेश के मुरैना में आईपीएस अधिकारी नरेंद्र तोमर को और उज्जैन में दिनदहाड़े एक प्रोफेसर का कत्ल किया था। किसी दो नम्बरी का क्या बिगड़ा बता दीजिए??? गुजरात में कई हजार लोग मौत के घाट उतार दिए गए, किसी ने नहीं सोचा कि कोई तो आखिरकार दोषी होगा... पूंजीवादियों की गोदी में बैठ कर कुछ मानवता के अपराधी प्रधानमंत्री बनने का सपना भी पालने लगे हैं।
लेकिन वो कुछ गलत नहीं सोचते क्योंकि जब तक हमारे यहां के लोग इंसानों की जिंदगी और ईमानदारी से प्यार करना नहीं सीखेंगे तब तक सत्येंद्र दुबे, मंजूनाथ, नरेंद्र तोमर, जिया उल हक और न जाने कितने योद्धा मारे जाएंगे और हम भारत के सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न लोकतांत्रिक गणराज्य के लोगों के सहयोग से लोकतांत्रिक गुंडावाद जारी रहेगा।
एक बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ
आपके विचार सहर्ष आमंत्रित हैं।