कल अगर ओलंपिक में मैरीकॉम कोई पदक जीत लाए तो वो मणिपुर में रहने वाली एक भारतीय महिला होगी और कई सालों से भूखी मरने वाली इरोम शर्मिला इनके लिए एक देशद्रोही और कानून तोड़ने वाली महिला हो जाती है।
आज फिजा के मौत की
खबर आई और कल ही गीतिका ने मौत को गले लगाया था। कहां है वो भगवाधारी और कहां हैं
वो टोपी वाले जो हमारे समाज में लड़कियों और औरतों को समाज में व्यवहार की नसीहत
देते हैं। इनमें से कुछ गुण्डे तो ऐसे भी हैं जो सरेआम अपनी मां और बहनों जैसी लड़कियों
को न सिर्फ मारते पीटते हैं बल्कि उन्हें नंगा तक कर देते हैं। बहुत पुरानी बात
नहीं हुई जब असम में सरेआम एक लड़की को नंगा किया था इन बेशर्मों ने। ये कहते हैं
कि हम धर्म और संस्कृति के रक्षक हैं।
क्या हुआ उनका जो
सरेआम एक लड़की को नंगा करते हैं? क्या होगा उनका जिनसे एक लड़की प्यार करते हुए
न सिर्फ अपना मज़हब छोड़ देती है बल्कि अपने मां-बाप का दिया हुआ नाम तक छोड़ देती
है? क्या एक अंधे समाज के विधायक को सजा मिलेगी क्योंकि उसने
एक लड़की का इस कदर शोषण किया कि उसने मौत को गले लगाना बेहतर समझा?
शर्मनाक....
कल अगर ओलंपिक में
मैरीकॉम कोई पदक जीत लाए तो वो मणिपुर में रहने वाली एक भारतीय महिला होगी और कई
सालों से भूखी मरने वाली इरोम शर्मिला इनके लिए एक देशद्रोही और कानून तोड़ने वाली
महिला हो जाती है।
कल जब बात होगी तो
यही ठेकेदार कहेंगे “अरे साहब! छिनाल थी, जीते जी भी अपने
परिवार का नाम खराब किया और मर के भी। किसी को क्या दुख होगा ऐसी औरत के मरने का। ” मैं कहता हूं कि क्या उस औरत का प्रेमी जो पुरूषोत्तम बना बैठा है और जो अपनी
बीवी और बच्चों को छोड़ने के बाद भी दोषी नहीं है, उसको सजा नहीं मिलनी चाहिए। अगर
छिनाल औरतों को मौत की सजा देना या मरने के लिए मजबूर करना ही इस समाज का दस्तूर
है तो उस घटिया आदमी को भी सरेआम मौत के घाट उतार देना चाहिए जो ऐसी किसी महिला को
सरेआम नंगा करे या मरने पर मजबूर करे।
दरअसल हमारे समाज की
बुनियाद ही ऐसी बनाई गई है जहां महिलाओं के लिए “त्रिया चरित्र” जैसा घटिया और शर्मनाक शब्द प्रयोग किया गया है। आखिर कब तक अपनी जान की कीमत
पर इस समाज में सीताओं को अग्नि परीक्षा देनी होगी? उस समाज में जहां हर पुरूष
पुरुषोत्तम बना बैठा हो और औरत पीड़ा की आग में जलती रहे...
अगर ऐसे भारत के
सपूतों को गर्व है अपने भारत पर तो गीतिका और फिजा जैसी तमाम बेटियां जो सिर्फ
झूठे सम्मान की बलि चढ़ती हैं, भारत की बेटियां नहीं हैं।
एक बेहतर भविष्य की
उम्मीद के साथ
आपके विचार सहर्ष
आमंत्रित हैं।
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