उच्चतम न्यायलय ने केंद्र सरकार से पूछा है कि आखिर विदेशी बेंकों में जमा काले धन के भ्रष्ट जमाखोरों के नाम उजागर क्यों नहीं किये जा रहे हैं, साथ ही इस काले धन को वापस लाने के लिए सरकार क्या कदम उठा रही है| इस पर केंद्र सरकार ने यह दलील दी है कि सरकार को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति , बैंकिंग गोपनीयता कानूनों और दोहरे कराधान से बचने के समझौतों का ख्याल करना है| न्यायालय की इस फटकार पर प्रधानमंत्री का यह बयान कि विदेशों में जमा काला धन तुरंत ही वापस नहीं लाया जा सकता है, सरकार की भ्रष्टाचार पर कमज़ोर रणनीति को ही उजागर करता है|
गौरतलब है कि विक्कीलीक्स भी ऐसे ही एक स्विस बैंक के खातों की गोपनीय जानकारियाँ प्राप्त करने का दावा कर रही है जिसमें काफी सारे भारतीय खाताधारकों के नाम हैं| सरकार के ऐसे रुख से उसकी नीयत पर संदेह होता है| ऐसे में अगर विक्कीलीक्स ये नाम उजागर कर देती है तब सरकार कैसे इन भ्रष्टाचारियों को बचा पाएगी|
वैसे भी सरकार इन दिनों बोफोर्स से लेकर टू-जी स्पेक्ट्रम जैसे भ्रष्टाचार के मुद्दों पर सड़क से लेकर संसद तक घिरी हुई है और सतर्कता आयुक्त पी. जे. थॉमस के मुद्दे पर भी वह उच्चतम न्यायालय से टकराव की मुद्रा में है| ये सारी बातें आम जन में असंतोष और संदेह को मज़बूत करती हैं| इसी पर उच्चतम न्यायालय ने भी टिपण्णी करते हुए यह माना है कि काले धन और भ्रष्टाचार का मुद्दा लोकहित से सम्बंधित है साथ ही सरकार से ये पूछा की यह रकम खरबों में है इसमें कितने शून्य होंगे| यह धन न केवल भारतीय नागरिकों के खून-पसीने की कमाई है बल्कि इसके वापस आने से लोकहितकारी योजनाओं में आनेवाली धन की कमी पूरी की जा सकती है| इसलिए विदेशों में जमा खरबों की रकम वापस आनी चाहिए| अतः बेहतर यही होगा कि सरकार आत्ममंथन करते हुए भ्रष्टाचारियों पर शिकंजा कसे|
ऐसा लगता है मानो की आप एक हिन्दी न्यूज पेपर का कोई न्यूज लिख रहे हो...निरज भाई गुस्सा मत होना..इस निबंध में आपकी अपनी सोच क्या है वो मुझे नहीं दिखता।आपने सिधे शब्दो में यह कह दिया कि उच्चतम न्यायलय ने यह कहा सरकार नें यह कहा....आपका क्या कहना है इस ब्लाँग के माध्यम से वो लोगो को बताइए तो शायद ज्यादा अच्छा रहेगा...न्यूज पेपर हम सभी लोग पढ़ते है।
जवाब देंहटाएंराहुल कुमार
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